🧠 क्या है पूरा मामला?
- मुंबई इंडियंस को DC के खिलाफ एक समय मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ रहा था।
- 135/2 स्कोर था, करुण नायर और पोरेल जैसे बल्लेबाज धमाका कर रहे थे।
- तभी डगआउट में बैठे रोहित शर्मा ने कर्ण शर्मा को गेंद बदलने का निर्देश दिया।
➡️ नई गेंद, नया मोमेंटम, नई चाल – और वही पल बना गेम चेंजर!
🎯 हरभजन सिंह ने क्या कहा?
“अगर महेला जयवर्धने की चलती, तो मुंबई ये मैच हार जाती। उन्हें रोहित की बात माननी चाहिए थी। कोच को ईगो साइड में रख देना चाहिए जब टीम की भलाई दांव पर हो।”
उन्होंने ये भी कहा कि:
“एक बार कप्तान होता है, तो वो हमेशा कप्तान की तरह ही सोचता है।”
🟠 कोच vs सीनियर लीडर – क्या दिखा इस मैच में?
| फैक्टर | महेला जयवर्धने | रोहित शर्मा |
|---|---|---|
| रणनीति | पुरानी गेंद जारी रखने के पक्ष में | गेंद बदलकर स्पिन अटैक बढ़ाने के पक्ष में |
| रिएक्शन | सहमत नहीं थे | कड़ा निर्णय लिया, और सफल रहा |
| नतीजा | हार की संभावना थी | टीम को जीत दिलाई |
💬 क्यों जरूरी है ये बहस?
इस बहस का सार यही है कि:
- सिर्फ रन बनाना ही क्रिकेट की “संपूर्णता” नहीं होती
- कभी-कभी एक फैसला, एक स्टेटस अपडेट, और एक कप्तानी सोच पूरे मैच की दिशा बदल देती है
🙌 रोहित शर्मा का मास्टरस्ट्रोक – लीडर की वापसी
- रन आउट की हैट्रिक हो या स्पिन का सही समय पर उपयोग – सब कुछ रोहित की प्लानिंग का ही हिस्सा था
- डगआउट में बैठकर भी उन्होंने साबित कर दिया कि वो सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक गेम चेंजर हैं
🚨 भज्जी का संदेश महेला को – बिल्कुल ऑन पॉइंट!
“ईगो को हटाइए, और टीम की ज़रूरतों को सबसे पहले रखिए।”
“रोहित की क्रिकेट समझ को नज़रअंदाज़ करना, मुंबई के लिए घाटे का सौदा हो सकता है।”
🤔 अब सवाल आपसे…
क्या मुंबई इंडियंस को फिर से रोहित शर्मा को कप्तानी की जिम्मेदारी सौंप देनी चाहिए?
या क्या उन्हें फील्ड में सक्रिय रोल में लाना चाहिए, ताकि ऐसे मास्टरस्ट्रोक मैदान में ही लगें?
👇 कॉमेंट में बताइए – हिटमैन की वापसी चाहिए या नहीं?
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