भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) से गेंद पर सलाइवा (लार) के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को हटाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह बॉलर्स के लिए स्विंग और रिवर्स स्विंग को नियंत्रित करने का एक अहम हिस्सा था और इसका बैन हटना चाहिए।

❓ क्यों लगा था सलाइवा बैन?

कोरोना महामारी के दौरान ICC ने खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए गेंद पर लार लगाने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, पसीने (Sweat) के इस्तेमाल की अनुमति थी। लेकिन बॉलर्स का मानना है कि पसीना उतना असरदार नहीं होता जितना सलाइवा।

🏏 शमी का बयान – ‘बॉलर्स के लिए मुश्किल हो गया है’

मोहम्मद शमी ने अपने बयान में कहा –
“गेंद पर लार का इस्तेमाल स्विंग को बेहतर बनाने में मदद करता था। अब बल्लेबाजों को ज्यादा फायदा मिल रहा है, जिससे संतुलन बिगड़ गया है। ICC को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए।”

शमी के इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में इस मुद्दे पर फिर से चर्चा तेज हो गई है। कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस फैसले को रिव्यू करने की मांग की है।

⚡ कैसे प्रभावित हुआ क्रिकेट?

स्विंग बॉलिंग पर असर: सलाइवा के बिना तेज गेंदबाजों को सीम मूवमेंट और रिवर्स स्विंग निकालने में दिक्कत हो रही है।
बल्लेबाजों को फायदा: पिच पर ज्यादा देर टिके रहने और लंबे शॉट्स खेलने में आसानी हो रही है।
टेस्ट क्रिकेट पर असर: लंबे प्रारूप में गेंदबाजों को पहले जैसी मदद नहीं मिल रही, जिससे संतुलन बिगड़ रहा है।

💬 क्या कहते हैं क्रिकेट एक्सपर्ट्स?

  • ग्लेन मैक्ग्रा: “सलाइवा से गेंद चमकाने की परंपरा सालों से रही है। यह एक स्वाभाविक तरीका था, जिससे बॉलर्स को मदद मिलती थी।”
  • वसीम अकरम: “रिवर्स स्विंग हमारे दौर की सबसे खतरनाक गेंदबाजी तकनीक थी, लेकिन अब यह लगभग खत्म हो गई है।”

🚨 क्या ICC करेगा बदलाव?

अब देखना होगा कि ICC इस मांग को कितना गंभीरता से लेता है। क्या टेस्ट और वनडे क्रिकेट में फिर से सलाइवा का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी? या फिर गेंदबाजों को नए तरीके ढूंढने होंगे?

💬 आपकी क्या राय है? क्या ICC को सलाइवा बैन हटाना चाहिए? कमेंट में बताएं!


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